प्रदेश सरकार की नल-जल योजना का हाल बेहाल, बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते अमिलिया के लोग

उप-संपादक सोनू श्रीवास्तव 11, अप्रैल 2019


द यूथ नेशन@सीधी/अमिलिया : बताते चलें गर्मी ने अपना भीषण आकार दिखा दिया है। जिस प्रकार की गर्मी अभी पढ़ रही है इससे भी विकराल रूप कुछ दिनों बाद देखने को मिलेगा परंतु सिहावल जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत अमिलिया में बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही जनता, साथ ही आपको बताते चलें अमिलिया ग्राम पंचायत में कहने को तो नल जल योजना कई वर्षों से चल रही है। परंतु हैरान करने वाली बात यह होगी कि जहां ग्राम पंचायत द्वारा लाखों रुपए का बिल बिजली विभाग को दिया जाता है। परंतु वही नल जल योजना से कितने लोगों के घर तक पानी पहुंचता है यह देख और सुनकर आप हैरान रह जायेंगे महेश 10 से 15 घर में ही सप्लाई है। पानी की वहीं ग्राम पंचायत द्वारा नल जल योजना के नाम पर लाखों रुपए तक गोलमाल किया जाता है । ग्रामीणों द्वारा हैंडपंप का लिया जाता सहारा, परंतु ऐसे बहुत सारे हैंडपंप है जो आज भी बंद पड़े हुए हैं । ग्रामीणों द्वारा कई बार विभाग के आला अधिकारियों को सूचित किया गया की हैंडपंप खराब है। मरम्मत करवा दिया जाए पानी का स्तर नीचे चला गया है पाइप डलवा दिया जाए परंतु अधिकारी-कर्मचारी जो जिले में वास करते हैं वह अपने निचले स्तर के कर्मचारियों को अवगत कराते हुए अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर फुर्सत हो जाते हैं जिसका खामियाजा ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ता है। हर रोज कर्मचारियों के चक्कर लगाते रहते हैं की साहब पाइप डलवा दीजिए या हैंडपंप बनवा दीजिए परंतु कर्मचारी को तो अपने वेतन से मतलब है। जब इस विषय पर सरपंच से बात की जाती है तो सरपंच द्वारा आश्वासन दिया जाता है कि जल्द ही मरम्मत करवा दी जाएगी और निजात मिल जाएगी, परंतु साहब गर्मी इतनी विकराल रूप ले चुकी है की अब पानी के बगैर ना तो जानवर और ना तो इंसान रह पाएंगे, यह आश्वासन की पुड़िया कब तक काम आएगी साथी एक बात और आपको बताते चलें अमिलिया चुरहट चौराहे पर एक भी हैंडपंप आपको नहीं मिलेगा जो आने जाने वाले यात्रियों की प्यास बुझा सके, उनको तो होटल का सहारा लेना पड़ता है होटल व्यवसाई भी क्या करें जब तक आप होटल में कुछ खाएंगे नहीं तो होटल वाले पानी कैसे देंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि खबर प्रकाशन करने के बाद शासन प्रशासन के आला अधिकारी किस प्रकार का कदम उठाते हैं।

 

वहीं लोकसभा चुनाव प्रचार जोरों से चल रहा है नेता भी आते हैं । और वही जवाब देते हैं आचार संहिता लगी है अभी हम कुछ नहीं कर सकते हमें जीत आइए हम जल्द ही आपकी समस्या का निराकरण करेंगे। परंतु यह सिलसिला हर 5 वर्ष में घूम फिर कर चलाता है। वही छोटे नेता जो वोट दिलवाने का ठेका ले रखे हैं उनके द्वारा भी कभी यह प्रयास नहीं किया जाता की इस समस्या से निजात दिलाई जा सके तो बने रहे हमारे साथ देखते रहे आप के हर मुद्दे पर हमारी खबर..!

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