आखिर यह कौन सी बला है “” #METOO “”

✍️ जज्बा सच कहने का ✍️

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द यूथ नेशन न्यूज

आजकल शोशल मीडिया व्हाट्सउप, फेसबुक, ट्विटर से लेकर तमाम इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंटमीडिया में #MeToo की चर्चा हो रही है। आखिर ये #MeToo  क्या बला है। जिसने आजकल शोशल मीडिया पर हंगामा मचा रखा है। दरसल #मी टू एक मूवमेंट है, जिसके द्वारा महिलायें खासकर वर्किंग वीमेन अपने साथ वर्कप्लेस/ऑफिस हो रहे या हो चुके यौन उत्पीड़न/ छेड़छाड़ के मामलों को हैशटैग मीटू (#ME Too) कैम्पेन द्वारा शोशल मीडिया में उठा रही हैं। जैसा कि इस कैम्पेन के नाम से ही इसका शाब्दिक अर्थ निकल रहा है ME Too (मतलब मै भी या मेरे साथ भी) अर्थात जो भी महिलायें इस तरह की घटनाओं का शिकार हुई हैं, या हो रही हैं, वो यह बताने के लिए कि मेरे साथ भी ये हो चुका है या हो रहा है इस हैशटैग के साथ #ME Too कैम्पेन से जुड़ रही है।

वैसे #मी टू कैंपेन की शुरूआत 2006 में अमेरिका से हुई थी। उसके बाद भारत में शायद पिछले वर्ष एक दो बार सुनने में आया था। अगर देखा जाये तो भारत में इसकी असली शुरुआत हाल ही में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने की। जब उन्होंने बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित नाना पाटेकर पर एक फिल्म की शूटिंग के दौरान गलत तरीके से छेड़छाड़ के गम्भीर आरोप लगाए। इसके बाद तो पूरे शोशल मीडिया में मी टू, मी टू छा गया। और फिल्म इंडस्ट्री की एक के बाद एक हस्तियों पर मी टू कैंपेन के तहत यौन उत्पीडन के आरोप लगने लगे। इस प्रकार फिल्म इंडस्ट्री के सफ़ेद लोगों का काला सच इस अभियान के जरिये आम लोगों तक पहुँचने लगा। जिसमें सबसे ऊपर चल रहे हैं छोटे पर्दे पर संस्कारी बाबूजी की भूमिका निभाने वाले आलोक नाथ, निर्माता निर्देशक साजिद खान, सुभाष घई, विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु आदि कई बड़ी फ़िल्मी हस्तियां मीटू के लपेटे में आ चुकी हैं। यही नहीं मीटू के फेरे में मौजूदा मोदी सरकार भी आ गई है। उनके मंत्री एमजे अकबर पर भी मी टू के तहत गम्भीर आरोप लगाए गए, जिसके उपरांत उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। सरकार अभी इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बच रही है। हालाँकि भाजपा की दो महिला मंत्रियों में इस पर अपनी राय देते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कही है।

इसी के साथ तमाम सामाजिक संगठन भी मीटू मीटू से प्रताड़ित महिलाओं के साथ खड़े हो गए है। इस बड़े मिजाज के मंच पर अभी बहुत कुछ आना बाकी है। अब देखना होगा कि इस मीटू मीटू के मंच पर कितने और चेहरे बेनकाब होते हैं।

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